अब यूँ ही थोड़ा ख़ामोश रहना है,
क्योंकि मेरे शब्दों के मतलब
अब अक्सर ग़लत निकाले जाते हैं।
क्योंकि मेरे शब्दों के मतलब
अब अक्सर ग़लत निकाले जाते हैं।
मैंने समझाना चाहा तो
वो सफ़ाई बन गई,
देखो ना,
बिना सुने ही मेरी हर बात
ग़लत हो गई।
वो सफ़ाई बन गई,
देखो ना,
बिना सुने ही मेरी हर बात
ग़लत हो गई।
मैं कुछ और कहना चाहता हूँ,
वो कुछ और ही समझ कर बैठे हैं।
मेरी साफ़ नीयत पर भी
वो इल्ज़ाम लगाए बैठे हैं।
अब थक गया हूँ
यक़ीन दिलाते-दिलाते
कि मैं वैसा नहीं
जैसा तुमने सोच लिया।
बस तुम ही परेशान नहीं रहते,
मैं भी अंदर से टूटता हूँ।
किसी दिन बैठ कर दिल से सुनना,
मैं भी अपने मन की कहता हूँ।
वो कुछ और ही समझ कर बैठे हैं।
मेरी साफ़ नीयत पर भी
वो इल्ज़ाम लगाए बैठे हैं।
अब थक गया हूँ
यक़ीन दिलाते-दिलाते
कि मैं वैसा नहीं
जैसा तुमने सोच लिया।
बस तुम ही परेशान नहीं रहते,
मैं भी अंदर से टूटता हूँ।
किसी दिन बैठ कर दिल से सुनना,
मैं भी अपने मन की कहता हूँ।
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