मैने कही सुना था, पर सही सुना था कि-
फिर एक वक्त ऐसा आता हैं जब आपको समझ आता हैं कि आपकी अहमियत वैसी नहीं हैं, जैसी उसकी अहमियत आपकी ज़िदगी में हैं। आप बहुत कोशिश करते हो खुद को समझाने की, सब कुछ संभालने की पर कुछ नहीं होता। और फिर एक दिन बहुत कोशिश करने के बाद जब आप ये समझते हो कि आपकी अहमियत कुछ नहीं हैं, फिर आप एक अलग इंसान बनते हो। फिर एक हॅंसता खेलता समझदार इंसान, पागल, ना समझ घोषित कर दिया जाता हैं।
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